जिलहिज्जा
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दिन 1
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जनाबे इब्राहीम अ0 का जन्मदिन।जनाबे इब्राहीम अ0 का जन्मदिन।
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हज़रत अली अ0 और जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स0 की शादी। ( 2 ही0 क़0 )हज़रत अली अ0 और जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स0 की शादी। ( 2 ही0 क़0 )
दिन 3
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जनाबे रसूले ख़ुदा स0 अपने आख़री हज के लिए मक्का पहुँचे। ( 10 ही0 क़0 )जनाबे रसूले ख़ुदा स0 अपने आख़री हज के लिए मक्का पहुँचे। ( 10 ही0 क़0 )
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पैग़म्बरे अकरम स0 ने हज़रत अली अ0 को सूरए बराअत की तबलीग़ के लिए हज के ज़माने में मक्के भेजा। ( 9 ही0 क़0 )पैग़म्बरे अकरम स0 ने हज़रत अली अ0 को सूरए बराअत की तबलीग़ के लिए हज के ज़माने में मक्के भेजा। ( 9 ही0 क़0 )
दिन 5
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इमाम मोहम्मद तक़ी अ0 शहादत। एक रेवायत के आधार पर। ( 220 ही0 क़0 )इमाम मोहम्मद तक़ी अ0 शहादत। एक रेवायत के आधार पर। ( 220 ही0 क़0 )
दिन 6
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इमाम मूसा काज़िम अ0 को बसरा के क़ैद ख़ाने में भेजा गया। ( 179 ही0 क़0 )इमाम मूसा काज़िम अ0 को बसरा के क़ैद ख़ाने में भेजा गया। ( 179 ही0 क़0 )
दिन 7
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इमाम मोहम्मद बाक़िर अ0 की शहादत। ( 114ही0 क़0 )इमाम मोहम्मद बाक़िर अ0 की शहादत। ( 114ही0 क़0 )
दिन 8
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तरवीया का दिन और हज का आरम्भ।तरवीया का दिन और हज का आरम्भ।
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इमाम हुसैन अ0 अपने क़ाफ़िले को ले कर मक्का से कूफ़ा की तरफ़ निकले। ( 60 ही0 क़0 )इमाम हुसैन अ0 अपने क़ाफ़िले को ले कर मक्का से कूफ़ा की तरफ़ निकले। ( 60 ही0 क़0 )
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जनाबे इब्राहीम अ0 और जनाबे इस्माईल अ0 पहला हज।जनाबे इब्राहीम अ0 और जनाबे इस्माईल अ0 पहला हज।
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हज के आमाल की शुरूआत। ( 10 ही0 क़0 )हज के आमाल की शुरूआत। ( 10 ही0 क़0 )
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इमाम मूसा काज़िम अ0 को बसरा के क़ैद ख़ाने में भेजा गया। ( 179 ही0 क़0 )इमाम मूसा काज़िम अ0 को बसरा के क़ैद ख़ाने में भेजा गया। ( 179 ही0 क़0 )
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हुसैन इब्ने अली इब्ने हसन की शहादत और फ़ख़ की घटना। ( 169 ही0 क़0 )हुसैन इब्ने अली इब्ने हसन की शहादत और फ़ख़ की घटना। ( 169 ही0 क़0 )
दिन 9
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कूफ़े में जनाबे मुस्लिम इब्ने अक़ील की शहादत। ( 60 ही0 क़0 )कूफ़े में जनाबे मुस्लिम इब्ने अक़ील की शहादत। ( 60 ही0 क़0 )
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अरफ़े का दिन।अरफ़े का दिन।
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मस्जिने नबवी में सब के दरवाज़े को बंद करने की घटना और हज़रत अली अ0 का दरवाज़ा सिर्फ़ खुला रखा गया। ( 2 ही0 क़0 )मस्जिने नबवी में सब के दरवाज़े को बंद करने की घटना और हज़रत अली अ0 का दरवाज़ा सिर्फ़ खुला रखा गया। ( 2 ही0 क़0 )
दिन 10
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बक़रा ईद।बक़रा ईद।
दिन 14
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पैग़म्बरे अकरम स0 के द्वारा चाँद के दो टुक्ड़े करने की घटना। (हिजरत से पाँच वर्ष पहले।)पैग़म्बरे अकरम स0 के द्वारा चाँद के दो टुक्ड़े करने की घटना। (हिजरत से पाँच वर्ष पहले।)
दिन 15
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इमाम अली नक़ी अ0 का जन्मदिन। ( 212 ही0 क़0 )इमाम अली नक़ी अ0 का जन्मदिन। ( 212 ही0 क़0 )
दिन 18
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ईदे ग़दीर। ( 18 ही0 क़0 )ईदे ग़दीर। ( 18 ही0 क़0 )
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उस्मान मारा गया। ( 34 ही0 क़0 )उस्मान मारा गया। ( 34 ही0 क़0 )
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हज़रत अली अ0 की बैयत के लिए लोग जमा हुए। ( 35 ही0 क़0 )हज़रत अली अ0 की बैयत के लिए लोग जमा हुए। ( 35 ही0 क़0 )
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मोआविया ने ख़ुदा और रसूल की मुख़ालिफ़त की।मोआविया ने ख़ुदा और रसूल की मुख़ालिफ़त की।
दिन 22
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जनाबे मीसमे तम्मार की शहादत। ( 60 ही0 क़0 )जनाबे मीसमे तम्मार की शहादत। ( 60 ही0 क़0 )
दिन 24
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पैग़म्बरे अकरम ने नजरान के ईसाइयों से मुबाहिला किया। ( 9 ही0 क़0 )पैग़म्बरे अकरम ने नजरान के ईसाइयों से मुबाहिला किया। ( 9 ही0 क़0 )
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हज़रत अली अ0 ने मस्जिद में फ़क़ीर को अंगूठी अता की।हज़रत अली अ0 ने मस्जिद में फ़क़ीर को अंगूठी अता की।
दिन 25
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लोगों ने हज़रत अली अ0 की बैयत की। ( 53 ही0 क़0 )लोगों ने हज़रत अली अ0 की बैयत की। ( 53 ही0 क़0 )
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ये वो दिन था जब हज़रत अली अ0 उनकी पत्नी जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स0 और उनके बेटों ने तीन दिन तक अपनी इफ़्तारी ग़रीबों, मोहताजों, और फ़क़ीरों को देदी और इन सब के सम्मान में क़ुर्आने मजीद का सूरए दहर उतरा।ये वो दिन था जब हज़रत अली अ0 उनकी पत्नी जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स0 और उनके बेटों ने तीन दिन तक अपनी इफ़्तारी ग़रीबों, मोहताजों, और फ़क़ीरों को देदी और इन सब के सम्मान में क़ुर्आने मजीद का सूरए दहर उतरा।
दिन 27
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इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0 के बेटे का देहांत हुआ और क़ुम में दफ़न हुए। (किताबे मसाएल के मालिक अली इब्ने जाफ़र।) ( 210 ही0 क़0 )इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0 के बेटे का देहांत हुआ और क़ुम में दफ़न हुए। (किताबे मसाएल के मालिक अली इब्ने जाफ़र।) ( 210 ही0 क़0 )
दिन 29
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मदीने के लोग इमाम हुसैन अ0 के ख़ून का बदला लेने के लिए उठ खड़े हुए जिनके सरदार अब्दुल्लाह इब्ने हन्ज़ला थे, और यज़ीद के सिपाहियों ने उन सब को क़त्ल कर दिया और यज़ीद की फ़ौज का सरदार मुस्लिम इब्ने अक़्बा था। ( 63 ही0 क़0 )मदीने के लोग इमाम हुसैन अ0 के ख़ून का बदला लेने के लिए उठ खड़े हुए जिनके सरदार अब्दुल्लाह इब्ने हन्ज़ला थे, और यज़ीद के सिपाहियों ने उन सब को क़त्ल कर दिया और यज़ीद की फ़ौज का सरदार मुस्लिम इब्ने अक़्बा था। ( 63 ही0 क़0 )